A poem by mom :) – about National GIRL CHILD DAY
As India is observing the NATIONAL GIRL CHILD DAY today,
here’s a poem written by my buddy, my creator, my Guru - my mom
Hope this sows some seeds for thoughts in some minds. Bless you all.
—————————————————–
“कन्या भविष्य की जननी है, कन्या को जन्म लेने दो.”
कन्या – नवजीवन का आधार
- शशि (www.AdityaPathakCreations.com)
ठहर सा गया है, जीवन का सहज स्वाभाविक विस्तार.
है दमित और उपेक्षित, क्यों जननी – नवजीवन का आधार .
जीने दो इन्हें जीने दो, जीवन की बगिया को महकने दो.
कोपलों को ज़रा फूटने दो, ज़रा इन्हें भी खिलने और निखरने दो.
खिलने से पहले ही न रौंदो इन्हें, नव-चेतना की नीव हैं ये, इन्हें भी ज़रा पनपने तो दो.
जड़ों को काट कर फूलों को न बचा पाओगे,
अज्ञान-वश, ये कैसा कदम उठा रहे हो?
ये कैसी मनमानी?
प्रकृति के सहज बहाव को रोक कर, कब तक कहाँ तक चल पाओगे?
प्रकृति के पालने में पलती-बढती, किशोरावस्था की दहलीज़ पर दस्तक देती वह.
कुरीतियों, कुपोषण, अज्ञान, अंधविश्वासों से भ्रमित,
आशंकाओं से घिरी, सहमती, ठिठकती वह.
धुंधली आँखों से कहीं खोजती अपने अस्तित्व को वह.
है घर का केंद्र नारी, परिधि पर है परिवार.
गर केंद्र है दीन-हीन, थका-हारा और उदास,
हैं अपरिचित से ये शब्द, प्रगति और प्रकाश.
है नारी जहाँ शांत, आनंदित और प्रफुल्लित,
नित-नयी उमंगें, हर तरफ फैला है मधुर सुवास.
तब ही होगा जीवन एक उत्सव उल्लास.
और होगा तभी समाज का एक संतुलित विकास.
केवल रिश्तों से नहीं पहचान मेरी, है मेरा भी स्वतन्त्र व्यक्तित्व.
जाग चुकी हूँ मैं! करती हूँ घोषणा!
संपत्ति नहीं मैं- है मेरा भी एक स्वतन्त्र अस्तित्व.
“आशा है के हर कन्या को अपने शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु उचित शिक्षा एवं वातावरण मिल सके.”
——
Just in case the Hindi font doesn’t work here, including the same poem in the form of an image file below.
Advertisement
Categories: Uncategorized


Reblogged this on Aditya Pathak's Blog.
Awesome composition..
Thanks Neena
Will convey to mom. Blessings !
Bahut achche shabdo me vyakhya ki hai…
Thanks Meetu
Cheers!!
beautiful and meaningful words….great thoughts!!:)…warm regards
Thanks Madhusudan
Will convey to the poetess
Best wishes !!